बरेली। अंडाशय में गांठ या सिस्ट होने की बात सुनकर महिलाएं अक्सर घबरा जाती हैं। हालांकि, हर गांठ कैंसर नहीं होती। खासकर कम उम्र की महिलाओं में अंडाशय में सिस्ट होना आम बात है। कई बार ये बिना किसी इलाज के अपने आप ठीक भी हो जाते हैं। लेकिन कुछ गांठों की समय पर जांच कराना जरूरी होता है, ताकि किसी गंभीर बीमारी का पता लगाया जा सके।मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत की गायनी ऑन्कोलॉजी विभाग की डायरेक्टर एवं क्लिनिकल लीड डॉ. कनिका बत्रा मोदी ने बताया कि “अंडाशय में गांठ का पता चलने पर महिला की उम्र, लक्षण, मेनोपॉज की स्थिति और अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट को ध्यान में रखा जाता है। यदि गांठ में ठोस हिस्सा हो, उसकी दीवार अनियमित हो या वह समय के साथ बढ़ रही हो, तो डॉक्टर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं।”उन्होंने बताया कि पेट में लगातार सूजन या भारीपन, पेट या पेल्विक हिस्से में दर्द, थोड़ी मात्रा में खाना खाने के बाद पेट भर जाना, भूख कम लगना और पेशाब या मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण दूसरी बीमारियों के कारण भी हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक बने रहने पर जांच जरूरी है।मेनोपॉज के बाद अंडाशय में नई गांठ मिलने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड और जरूरत के अनुसार अन्य जांच कराते हैं। CA-125 नामक ब्लड टेस्ट भी कुछ मामलों में मददगार होता है, लेकिन केवल इस जांच से कैंसर की पुष्टि नहीं की जा सकती।डॉ. मोदी ने कहा कि “यदि गांठ संदिग्ध हो, लगातार बढ़ रही हो या परिवार में कैंसर का इतिहास हो, तो गायनेकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। समय पर जांच से सही बीमारी का पता लगाने और उचित इलाज शुरू करने में मदद मिलती है। इसलिए घबराने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें और लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
ओवेरियन मास यानी अंडाशय में गांठ: कब सावधान होने की जरूरत है